लाल बहादुर शास्त्री - Lal Bahadur Shastri

January 11, 2025
लाल बहादुर शास्त्री - Lal Bahadur Shastri

लाल बहादुर शास्त्री एक भारतीय राजनीतिज्ञ और राजनेता थे, जिन्होंने 1964 से 1966 तक भारत के दूसरे प्रधान मंत्री के रूप में कार्य किया।

लाल बहादुर शास्त्री का जीवन - Lal Bahadur Shastri Biography in Hindi

नाम लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri)
ख्याति / पद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी एवं "जय जवान, जय किसान" नारे के जनक
जन्म तिथि 2 अक्टूबर 1904
जन्म स्थान मुगलसराय (अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर), संयुक्त प्रांत, ब्रिटिश भारत (उत्तर प्रदेश)
पिता मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव (स्कूल शिक्षक एवं क्लर्क)
माता रामदुलारी देवी
करियर / कार्यक्षेत्र असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी; स्वतंत्र भारत के रेल मंत्री, परिवहन व संचार मंत्री, वाणिज्य व उद्योग मंत्री तथा गृह मंत्री; 1964 से 1966 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में नेतृत्व; 1965 के भारत-पाक युद्ध में निर्णायक नेतृत्व तथा श्वेत क्रांति एवं हरित क्रांति को प्रोत्साहन
पत्नी ललिता शास्त्री (विवाह: 16 मई 1928)
संतान 6 संतान - 4 पुत्र (हरिकृष्ण, अनिल, सुनील और अशोक शास्त्री) एवं 2 पुत्रियाँ (कुसुम और सुमन)
सम्मान भारत रत्न (1966, मरणोपरांत - यह सम्मान पाने वाले प्रथम व्यक्ति)
निधन 11 जनवरी 1966 (ताशकंद, उज़्बेक सोवियत समाजवादी गणराज्य)


लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को ब्रिटिश भारत के छोटे से शहर मुगलसराय में हुआ था। शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय में शारदा प्रसाद श्रीवास्तव और रामदुलारी देवी के घर हुआ था।

उन्होंने ईस्ट सेंट्रल रेलवे इंटर कॉलेज और हरीश चंद्र हाई स्कूल में पढ़ाई की, जिसे उन्होंने असहयोग आंदोलन में शामिल होने के लिए छोड़ दिया । उन्होंने मुजफ्फरपुर में हरिजनों की भलाई के लिए काम किया और अपना जाति-व्युत्पन्न उपनाम "श्रीवास्तव" हटा दिया।

वह महात्मा गांधी के समर्पित अनुयायी थे और अहिंसा और सविनय अवज्ञा के सिद्धांतों से प्रेरित होकर, भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में सक्रिय रूप से भाग लिया। विभिन्न विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल होने के कारण उन्हें ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा कई बार गिरफ्तार किया गया था।

मंत्री पद

1947 में भारत की आजादी के साथ, शास्त्री एक स्वतंत्रता सेनानी से एक राजनेता बन गये। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक प्रमुख सदस्य बने और स्वतंत्रता के बाद की सरकार में प्रमुख मंत्री पदों पर रहे। उनहोने रेल मंत्री, गृह मंत्री और विदेश मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी।

भारत के प्रधान मंत्री

शास्त्री के राजनीतिक करियर में महत्वपूर्ण मोड़ 1964 में आया जब जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद उन्हें भारत के प्रधान मंत्री के रूप में चुना गया। उनके नेतृत्व की विशेषता उनका विनम्र और ज़मीन से जुड़ा व्यक्तित्व था। उन्होंने आर्थिक आत्मनिर्भरता की वकालत की और राष्ट्रीय एकता और आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर बल दिया।

1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध

शास्त्री के प्रधानमंत्रित्व काल की सबसे चुनौतीपूर्ण अवधियों में से एक 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध था। उनका प्रसिद्ध नारा, "जय जवान, जय किसान" (सैनिक की जय, किसान की जय) ने एक मजबूत, एकजुट भारत के लिए उनके दृष्टिकोण को दर्शाया। इस वाक्यांश ने देश के विकास में सैन्य और कृषि दोनों क्षेत्रों के महत्व पर प्रकाश डाला।

ताशकंद समझौता

शांति के प्रति शास्त्री की प्रतिबद्धता तब स्पष्ट हुई जब उन्होंने संघर्ष को समाप्त करने के लिए काम किया और पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता शुरू की। जनवरी 1966 में, उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए ताशकंद, जो उस समय सोवियत संघ का हिस्सा था, की यात्रा की। दुखद बात यह है कि समझौते के अगले ही दिन ताशकंद में उन परिस्थितियों में उनका निधन हो गया, जो अटकलों का विषय बनी हुई हैं। 

अंत समय 

11 जनवरी, 1966 को लाल बहादुर शास्त्री का रहस्मयी परिस्तिथियों में निधन हो गया। लाल बहादुर शास्त्री की विरासत सादगी, अखंडता और राष्ट्र की सेवा के प्रति अटूट समर्पण के प्रतीक के रूप में कायम है। भारत के प्रधान मंत्री के रूप में उनके संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल ने देश के इतिहास पर एक अमिट छाप छोड़ी। शास्त्री जी जीवनभर अपनी ईमानदारी और विनम्रता के लिए जाने जाते रहे। उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनका समरक दिल्ली में "विजय घाट" के नाम से जाना जाता है।